रोबोटिज्म और आप
आज चारों ओर स्वचालित व्यवस्थाओं का बोलबाला
है। मानों हमारी सभ्यता ने कोई नया इज्म; कैपिटलिज्म, कम्यूनिज्म,
सोशलिज्म आदि की तर्ज पर
रोबोटिज्म प्रस्तावित किया है। जब आप ई-मेल टाइप करते हैं तो उसका साॅफ्टवेयर एक
सर्वोचित शब्द आपको सुझाता है। आॅटोमैटिक स्पलिंग चेक, ग्रामर चेक व
अनुवाद आदि पहले से कहीं अधिक क्षमता के साथ उपलब्ध हैं। यदि किन्डल पर किताब पढ़
रहे हों और किसी शब्द का अर्थ स्पष्ट न हो तो उस शब्द को जरा सा दबाने पर उसके
सारे अर्थ व प्रयोग स्क्रीन पर आजाते हैं। ऐसी अनेक बातों से हम परिचित हैं और यह
भी सम्भव है कि इस तरह की बातें अब हमें आश्चर्यचकित न
करती हों। फिर क्या! प्रश्न ये उठता है यदि रोबोटिज्म एक वास्तविकता बन चुका है तो क्या उसके
अनुरूप किसी कार्य-संस्कृति के निर्माण की ज़रूरत है? आइये कुछ साधारण
सी खबरों पर गौर करें।
आज से लगभग दो दशक पहले जापान में एक छोटी बच्ची की मौत
स्कूल के बन्द होते गेट में फंसने से हो गयी थी। उस स्कूल का स्वचालित मेन गेट तय
समय पर बन्द होता था और वह बच्ची एक सेकण्ड से भी कम समय की देरी से अन्दर जा रही
थी। शायद उस स्कूल की तात्कालिक कार्य-संस्कृति में उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा का
समुचित प्रबन्ध नहीं था। हमारे देश में भोपाल गैस
कांड शायद वैसी ही किसी कार्य-संस्कृति में छिपी उपेक्षा का प्रतीक है। हाल ही में
छपी एक खबर के अनुसार उसी जापान के किसी होटल में तैनात 300 रोबोटों में से
123 को इसलिये हटा दिया गया क्योंकि क्योंकि वे लक्षित रूप से काम नहीं
कर पा रहे थे। क्या यह घटना किसी अन्य प्रकार की कार्य-संस्कृति की ओर इशारा कर रही है?
दूसरी तरफ हमारे देश की
अनेक एयरलाइन्स तनावग्रस्त हैं। किंगफिशर बन्द हो चुकी है। एयर इंडिया को
खरीददार नहीं मिल रहे हैं। एक अन्य एयरलाइन के विदेशी निवेशक ने आधे मूल्य पर
प्रमोटर के शेयर खरीदने का प्रस्ताव किया है। दशकों से जिन असेट्स
को पोषित किया गया आज उनके मोल नहीं लग पा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर हाल में ही उभरे
स्टार्टअप्स अपनी उत्कृष्ट कार्य-संस्कृति के चलते बेतहाशा वैल्यूएशन कमांड
कर रहे हैं।
सवाल ये है कि एमएसएमई क्या करें? अपनी
कार्यशैली को
माहौल के अनुरूप बनायें, और क्या! जब दुनिया के सभी प्रकार के
उपक्रम; सरकारें, इन्स्टीट्यूशन्स, फौज, पुलिस,
उद्योग,
व्यापार,
सभी
के सभी, अपनी कार्य-संस्कृति के पुर्ननिर्माण में लगे हैं तो एमएसएमई इस बात
से परहेज़ क्यों करें?
आपके चिन्तन हेतु एक विचार प्रक्रिया यहाँ दी
जा रही है। जैसे जापान के उस होटल ने उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रख कर रोबोट्स को
हटा दिया क्या उसी तौर पर हम हमारे उद्योग-धन्धों के उपयोगकर्ताओं पर गौर करें।
साथ ही साथ कर्मचारियों को भी उपयोगकर्ताओं के रूप में देखने का प्रयास करें। विश्वास है कि आपके
द्वारा की गयी एक पहल को आपकी टीम के सदस्य पहचान जायेंगे और आपको जल्द ही उसका
सकारात्मक रिसपांस देखने को मिलेगा।

