Friday, November 16, 2018

उद्योग चर्चा - 04 नेक्स्ट लेवल

अधिकांश उद्योगपति कभी-न-कभी अपने उद्योग की अगली पायदान या ‘‘नेक्स्ट लेवल’’ के बार में सोचते हैं। दूसरी ओर कुछ ऐसे भी होंगे जो काम में इतने व्यस्त कि इस बारे में सोचने की फुर्सत ही नहीं मिलती और नेक्स्ट लेवल वैसे ही आजाता है। ऐसे भी उद्योग होंगे जिन्हें अस्तित्व के लिये संघर्ष करना पड़ रहा हो और ऐसे में किसी भी प्रकार के डेवलेपमेंट का विचार मात्र भी अनुपयोगी प्रतीत होता हो। फिर भी ‘‘नेक्स्ट लेवल’’ की सर्वव्यापक उपयोगिता को एकदम नज़रअन्दाज़ नहीं किया जा सकता है। गवर्नमेंट सप्लाई, जान-पहचान, पुराने रिश्ते, बड़े उद्योगों की छत्र-छाया और अनेक ऐसे कारण हैं जो कई उद्योगों के अटल अस्तित्व की वजह बने हैं। इसके विपरीत कई नये उद्योगों ने मार्केट को साध कर भी स्वयं को खड़ा कर लिया है। कुछ उद्योगों ने पुराने उत्पादों से बेरूखी कर एकदम नये प्रकार के उत्पादों को लेकर नेक्स्ट लेवल की खोज में निकल पड़े हैं। नेक्स्ट लेवल तक ले जाने वाली सीढ़ी न तो स्पष्ट दीख पड़ती है और न ही उसकी कोई डिझाइन बाज़ार में तैयार मिलती है। परन्तु नेक्स्ट लेवल में गज़ब का आकर्षण है; अतः उसके लिये समुचित प्रयास हो इस बाबद कुछ बातें आपके विचारार्थ प्रस्तुत हैं।

स्पेयर कैपेसिटी का उपयोग- अधिकांश उद्योगों की स्थापना के समय ही अतिरिक्त क्षमता का प्रवधान रखा जाता है। उद्योग संघ अपने सदस्यों में से एक छोटा समूह बना कर आवश्यक जानकारियों के आदान-प्रदान की व्यवस्था कर सकते हैं। स्पेयर कैपेसिटी के उपयोग से अर्जित धन उत्पादों की कीमत कम करने में काम आ सकता है।

आउट आॅफ बाक्स थिंकिंग- एक नगर में किसी गीयर फैक्ट्री में दर्जनों मशीनें चालू हालत में बन्द रखीं हैं। सारी व्यवस्थायें ठीक हैं परन्तु काम बन्द है। कारण, कोई आॅटोमोबाइल कम्पनी गीयर्स ऐसे भाव में बेच रही है जितने में यह कम्पनी गीयर बनाने के लिये स्टील खरीदती है। ऐसे में यह कम्पनी जिसके कर्मचारी घर बैठे हैं यदि कुछ कर्मचारियों को उन मशीनों पर मनचाहा जाॅबवर्क लाकर करने की छूट दे सके तो उससे होने वाली आय से वह कम्पनी अपने गीयर्स की कीमत सब्सिडाइज़ कर मार्केट में एक बार फिर खड़े होकर अगली प्लानिंग कर सकती है।

कांट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग- कुछ उद्योग जिनके पास उचित तकनीकी क्षमता है वे मार्केट लीडर्स के लिये उनके डिझाइन के अनुसार उत्पादन करें। इसके लिये भी उद्योग संघ अपने सदस्यों में से एक छोटा समूह बना कर बड़े उद्योगों या विदेशों में स्थित उद्योगों को यहाँ उपलब्ध क्षमताओं का दोहन करने के लिये आमंत्रित कर सकते हैं।

ह्यूमन रिसोर्स लीवरेजिंग- उद्योगों में कार्यरत कर्मचारियों में निहित क्षमताओं का विस्तार कर उन्हें काम के जरिये अधिक सन्तोष व आमदनी के लिये प्रेरित कर उद्योग नेक्स्ट लेवल तक जा सकते हैं। उद्योग की सूक्ष्मताओं से परिचित ऐसे कर्मचारी बड़ी आसानी से ग्राहकों से डील कर सकते हैं। उन्हें विक्रयकला का प्रशिक्षण देकर उद्योग के प्रतिनिधित्व के लिये तैयार किया जा सकता है।

जीएसटी द्वारा विस्तारित मार्केट का दोहन- जीएसटी ने देश के अन्य कई भागों को आपके लिये सम्भावित मार्केट के रूप में खोल दिया है। मार्केटिंग टीम को प्रोफेशनल व और अधिक सक्षम बना कर दूर-दराज के बाज़ारों को अपने उद्योग से जोड़ने के अवसरों का लाभ उठायें।

विश्व व्यापार व चीन-अमेरिका संघर्ष- चीन व अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर संघर्ष उभर चुका है। यदि निकट भविष्य में उनके बीच कोई समझौता भी हो जाता है तो भी उनके बीच पड़ चुकी दरार ही दूसरे देशों के लिये अवसर का काम करेगी। 1970 के दशक में ऐसा ही गतिरोध जापान व अमेरिका के बीच उभर कर आया था। उस समय चीन समेत अन्य एशियाई देशों द्वारा किये प्रयास कालान्तर में उनके लिये लाभप्रद साबित हुए थे। ऐसी सूरत में भी उद्योग संघ के नेतृत्व में समान उद्योग अपने मार्केट का अन्य देशों में विस्तार करके लाभान्वित हो सकते हैं। ऐसे प्रयास हमारे देश में चल रहे हैं। इस बारे में कम्बल उद्योग द्वारा सोनीपत में किये सामूहिक व सफल प्रयास विशेष तौर पर अनुकरणीय हैं।

आशा है आपके उद्योग संघ में भी इस प्रकार की युक्तियों को लेकर आम चर्चा हो सकेगी जिसके फलस्वरूप कई उद्योग अपना नेक्स्ट लेवल पा लेंगे। 

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