उद्योग-चर्चा 01 - विश्वसनीयता
उद्योग-धंधों में विश्वसनीयता का होना बिलकुल किस्मत का आपके साथ चलने
जैसा है। न केवल आपके ग्राहक, बल्कि आपके
सहयोगी व कर्मचारी भी और यहाँ तक कि आपके परिवार जन भी हर मौके पर इसकी परख करते
रहते हैं। ऐसे आवश्यक गुण का आपके उद्योग में विस्तार कैसे हो इस बात को लेकर कुछ
युक्तियाँ आपके विचारार्थ प्रस्तुत हैं:-
वचनबध्द रहें- ज़ुबान का पक्का होना केवल व्यक्तिगत तौर पर ही नहीं बल्कि संस्थागत तौर पर भी उपयोगी है। इस युक्ति का इस्तेमाल आपके सहयोगी व कर्मचारी अपने हर व्यवहार में करें; चाहे वह परस्पर व्यवहार हो या फिर ग्राहकों व सप्लायर्स के साथ किया जा रहा संस्थागत व्यवहार ही क्यों न हो।
चरित्र निर्माण करें- सहयोगियों व कर्मचारियों के चरित्र निर्माण में उनके सहायक के तौर पर पेश आयें। किसी को भी चरित्र कहीं से रेडीमेड नहीं मिलता है। उसे तो तिनका-तिनका बनाया जाता है। आप दूसरों के समक्ष ऐसे उदाहरण व अवसर रखें जो उनके चरित्र निर्माण में सहायक हों।
प्रतिभा निखारें- आपके सहयोगियों व कर्मचारियों की छुपी हुई प्रतिभा को बाहर आकर निखरने का मौका दें। उद्योग के साधारण कामों में भी ऐसे अवसरों का निर्माण करें जो उनकी प्रतिभा को चुनौती देते हों।
कार्यकुशलता पर बल दें- चरित्र के जैसे कार्यकुशलता भी कहीं तैयार नहीं पायी जाती है; काम करते हुए ही उसमें इजाफा होता है। आपके सहयोगियों व कर्मचारियों की कार्यकुशलता का लाभ आपके उद्योग को ही तो मिलने वाला है। काम सीख कर छोड़ जाने वाला कर्मचारी भी अपने पीछे बहुत कुछ उपयोगी छोड़ कर जाता है; और जरा सी सावधानी बरतने पर किसी भी अप्रत्याशित नुकसान से बचा जा सकता है।
उद्देश्यात्मक कार्यप्रणाली अपनाऐं- ऐसी कार्यप्रणाली या सिस्टम्स अपनाऐं जो प्रतिष्ठान में उद्देश्यात्मक सोच को स्थापित करे। हर व्यक्ति प्रतिष्ठान के जाहिर उद्देश्यों के अनुरूप कार्यरत रहे व तदनुसार अपनी सोच बनाये।
उत्तम सम्प्रेषण का प्रयोग करें- असरदार सम्प्रेषण के अवयव, जैसे कि परस्पर आदरभाव, वार्तालाप में नेत्र सम्पर्क, उत्कृष्ट श्रवणशीलता तथा पहले दूसरों को समझ कर बाद में उन्हें समझाने का प्रयास आदि का प्रयोग करें।
तो ये हैं कुछ युक्तियाँ जिनका समयोचित प्रयोग आपके उद्योग में विश्वसनीयता की वृध्दि का मार्ग प्रशस्त करेगा।
वचनबध्द रहें- ज़ुबान का पक्का होना केवल व्यक्तिगत तौर पर ही नहीं बल्कि संस्थागत तौर पर भी उपयोगी है। इस युक्ति का इस्तेमाल आपके सहयोगी व कर्मचारी अपने हर व्यवहार में करें; चाहे वह परस्पर व्यवहार हो या फिर ग्राहकों व सप्लायर्स के साथ किया जा रहा संस्थागत व्यवहार ही क्यों न हो।
चरित्र निर्माण करें- सहयोगियों व कर्मचारियों के चरित्र निर्माण में उनके सहायक के तौर पर पेश आयें। किसी को भी चरित्र कहीं से रेडीमेड नहीं मिलता है। उसे तो तिनका-तिनका बनाया जाता है। आप दूसरों के समक्ष ऐसे उदाहरण व अवसर रखें जो उनके चरित्र निर्माण में सहायक हों।
प्रतिभा निखारें- आपके सहयोगियों व कर्मचारियों की छुपी हुई प्रतिभा को बाहर आकर निखरने का मौका दें। उद्योग के साधारण कामों में भी ऐसे अवसरों का निर्माण करें जो उनकी प्रतिभा को चुनौती देते हों।
कार्यकुशलता पर बल दें- चरित्र के जैसे कार्यकुशलता भी कहीं तैयार नहीं पायी जाती है; काम करते हुए ही उसमें इजाफा होता है। आपके सहयोगियों व कर्मचारियों की कार्यकुशलता का लाभ आपके उद्योग को ही तो मिलने वाला है। काम सीख कर छोड़ जाने वाला कर्मचारी भी अपने पीछे बहुत कुछ उपयोगी छोड़ कर जाता है; और जरा सी सावधानी बरतने पर किसी भी अप्रत्याशित नुकसान से बचा जा सकता है।
उद्देश्यात्मक कार्यप्रणाली अपनाऐं- ऐसी कार्यप्रणाली या सिस्टम्स अपनाऐं जो प्रतिष्ठान में उद्देश्यात्मक सोच को स्थापित करे। हर व्यक्ति प्रतिष्ठान के जाहिर उद्देश्यों के अनुरूप कार्यरत रहे व तदनुसार अपनी सोच बनाये।
उत्तम सम्प्रेषण का प्रयोग करें- असरदार सम्प्रेषण के अवयव, जैसे कि परस्पर आदरभाव, वार्तालाप में नेत्र सम्पर्क, उत्कृष्ट श्रवणशीलता तथा पहले दूसरों को समझ कर बाद में उन्हें समझाने का प्रयास आदि का प्रयोग करें।
तो ये हैं कुछ युक्तियाँ जिनका समयोचित प्रयोग आपके उद्योग में विश्वसनीयता की वृध्दि का मार्ग प्रशस्त करेगा।


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