Sunday, July 2, 2017

प्रोफेश्नलिज़्म का मानवीयकरण – 01

क्या आपको लगता है, प्रोफेश्नलिज़्म के मानवीयकरण की ज़रूरत है, यह प्रश्न मैंने पिछले दिनों के एक सी-लेवल एक्ज़ीक्यूटिव्स के लिये आयोजित सेमीनार के दौरान मेरे साथ टेबल साझा कर रहे एक कम्पनी के एचआर हेड से पूछा था। उनका संक्षिप्त उत्तर था, यही तो आज का ज्वलन्त प्रश्न है! मज़े की बात तो यह है कि पिछले वर्ष इसी प्रकार के एक अन्य सेमीनार में उसी कम्पनी के उसी विभाग के एक असिस्टेंट मैनेजर से मेरी भेंट हुई थी और यही प्रश्न मैंने उनके सामने भी रखा था। उनका कहना था, प्रोफेश्नलिज़्म मानवीय होने के अलावा कुछ और भी हो सकता है क्या! इन दोनों अधिकारियों की प्रतिक्रियाओं में अपने-अपने विश्वासों की महक है - उनके द्वारा अपनायी कार्य संस्कृति की झलक है देखने में आती है।


यदि आप किसी औद्योगिक या व्यापारिक प्रतिष्ठान में कार्यरत हैं तो अपने आसपास चल रही प्रोफेश्नलिज़्म की वार्ताओं में मानवीयता की झलक खोजने का प्रयास करें। यदि आप किसी पारखी के रूप में इस विषय से जुड़ना चाहें तो प्रोफेश्नल के इस विवरण को ध्यान में रखें- सच्चा प्रोफेश्नल वह है जो अपने काम की योजना बना सके एवं उस प्लान को समयबध्द रूप से संचालित कर सके।


अब आप अपने सहकर्मियों को व अन्य व्यक्तियों में इस प्रकार की कार्यशैली की तलाश करें। जो लोग इस प्रकार की कार्यशैली का प्रयोग कर रहे हैं उनके कामकाजी व्यवहार में मानवीयता की कितनी झलक आप को नज़र आती है। इसके विपरीत उन व्यक्तियों का कामकाजी व्यवहार देखें जो अपने काम को योजनाबध्द ढ़ंग से करने में कतराते हैं। दोनों प्रकार के लोगों के बीच तुलना करने पर आपको कैसा महसूस हो रहा है? क्या आप स्वयं के काम का प्लान बना कर उस प्लान के अनुसार काम करते हैं या नहीं; और अब आगे से कैसे करना चाहेंगे।


इसके साथ ही अपने मित्रों की वार्ताओं में इस बात की जाँच करें कि आज प्रोफेश्नलिज़्म के नाम पर किस प्रकार की कार्य संस्कृति या मैनेजमेंट प्रैक्टिसेज़ व्यवहार में हैं।


आपकी टिप्पणियों की प्रतीक्षा में,
नवेन्दु महोदय


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